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Dr. Yogesh Vyas

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वास्तु और घर की सीढ़ियां

घर में हर चीज वास्तु शास्त्र के अनुसार हो तो खुशहाली आती है और वास्तु के अनुसार न हो तो घर में दुख तथा अनिद्रा, पेट दर्द, ब्लडप्रेशर जैसी गंभीर बिमारियों का वास होता है। घर के किचन और टॉयलेट को पेट संबंधी बीमारियों का मुख्य कारण माना जाता है! ये सभी उपाय सामान्य से उपाय हैं अतः, ज्योतिष संबंधी किसी भी समाधान के लिए जयपुर कार्यालय पर सम्पर्क कर सकते हैं। वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में सीढ़ियां बनवाते समय कुछ बातों का ध्यान दें—

● घर में टॉयलेट या बाथरूम सीढ़ियों के नीचे बनाना वास्तु शास्त्र की दृष्टि में अच्छा नहीं माना जाता है।

● घर के ईशान कोण में सीढ़ियों का निर्माण कभी नहीं करवाना चाहिए। इस क्षेत्र में सीढ़ियां बनवाने से आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, व्यवसाय में नुकसान एवं स्वास्थ्य की हानि भी होती है।

● घर के दक्षिण-पूर्व में सीढ़ियां बनवाने से संतान के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

● यदि घर के मकान मालिक को नीचे रहना हो तो ऐसी स्थिति में ऊपर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां कभी भी घर के सामने नहीं बनवानी चाहिए।

● सीढ़ियों के आरंभ एवं अंत में द्वार अवश्य बनवाना चाहिए।

● टॉयलेट-बाथरूम अलग होने चाहिए।यदि स्नानघर व शौचालय एक साथ हैं,तो स्नानघर में हमेशा एक कांच की कटोरी में साबुत नमक भरकर रखें और हर सप्ताह इसे बदलते रहें। वास्तु शास्त्र के अनुसार नमक नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है।

● सीढ़ियों के दोनों ओर रेलिंग लगी होनी चाहिए या एक तरफ दिवार लगी होनी चाहिए ।

● सीढ़ियों के नीचे जूते,चप्पल की रैक या अलमारी अनुचित है। सीढ़ियों के नीचे का स्थान हमेशा खुला रहना चाहिए।

● वास्तुशास्त्र के मुताबिक बेडरूम में बैड के ऊपर छत का बीम या मोटी पट्टी नहीं होनी चाहिए।

● यदि घर बनवाते समय सीढ़ियों से संबंधित कोई वास्तु दोष रह गया हो तो उस स्थान पर बारिश का पानी- मिट्टी के कलश में भरकर तथा मिट्टी के ढक्कन से ढककर जमीन के नीचे दबाना चाहिए

● बेडरूम में कभी भी मंदिर या पूजा स्थान नहीं रखना चाहिए यह वास्तुशास्त्र की दृष्टि से अच्छा नहीं माना जाता है।

● मकान की सीढ़ियां पूर्व से पश्चिम या उत्तर से दक्षिण की ओर जाने वाली होनी चाहिए।

● सीढ़ियों के लिए भवन के पश्चिम, दक्षिण या र्नैक्षत्य का क्षेत्र सर्वाधिक उपयुक्त होता है।

● सीढ़ियां उतरी या पूर्वी दीवार से जुड़ी हुई नहीं होनी चाहिए।

● वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर में शौचालय बनाने के लिए सबसे उत्तम स्थान दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण दिशा है।

● वास्तुशास्त्र के अनुसार बेसिन ऐसे लगाया जाना चाहिए, ताकि शौच के समय व्यक्ति का मुंह पूर्व दिशा की तरफ न हो।

● घर में वास्तु दोष समाप्त करने के लिए वास्तु दोष निवारक यंत्र का प्रयोग किया जा सकता है, इसके अतिरिक्त स्वास्तिक का चिह्न भवन के मुख्य द्वार पर अंकित करने से भी वास्तु दोष खत्म हो जाते हैं।

● सीढ़ियां वास्तु नियमों के अनुरूप बनाई जायें तो, घर की सीढ़ियां हमारे लिए सदैव ही सफलता की सीढ़ियां बनती हैं!

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