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Dr. Yogesh Vyas

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कुण्डली में कालसर्प योग और उपाय

  कुण्डली में जब सभी ग्रह राहु-केतु के मध्य कैद हो जाते है तब पूर्ण कालसर्प योग बनता है। इस स्थिति में जिस स्थान पर राहु होगा, उस भाव से सम्बन्धित समस्यायें जीवन में दुःख देती है। पूर्ण फलादेश सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण से ही संभव है अतः कुंडली एवं रत्न परामर्श हेतु जयपुर कार्यालय पर सम्पर्क करें !


■ काल सर्प दोष के सामान्य प्रभाव:-

● गरीबी और धन का विनाश !
● चिंता और अनावश्यक तनाव !

●व्यक्ति को समस्याएं और टूट जाता है !
● कम मानसिक शांति !

● कम आत्मविश्वास, स्वास्थ्य-गिरावट
● व्यापार और नौकरी का नुकसान !
● दीर्घायु कम, मित्रों और सहयोगियों से कपट !
● रिश्तेदारों और दोस्तों से बहुत कम मदद !
● परिवार के सदस्यों और दोस्तों के साथ बुरा संबंध !

■ कालसर्प योग शांति के उपाय--

● काल सर्प दोष निवारण यंत्र घर में स्थापित करके उसकी नित्य प्रति पूजा करें ।
● घर में पारद का शिवलिंग स्थापित करें !
● अमावस्या के दिन पितरों को शान्त कराने हेतु दान आदि करें तथा कालसर्प योग शान्ति पाठ कराये।
● महामृत्युंजय का जप एवं सर्पराज भगवान आशुतोष शिव की आराधना सर्वश्रेष्ठ एवं कारगर उपाय है।
● शिव लिंग पर चढ़ाने योग्य तांबे का एक बड़ा सर्प बनाएं, साथ ही सर्प-सर्पिणी का चांदी का जोड़ा बनवाएं।
● किसी शुभ मुहूर्त में ओउम् नम: शिवाय' की 11 माला जाप करने के उपरांत शिवलिंग का गाय के दूध से अभिषेक करें और शिव को प्रिय बेलपत्र आदि सामग्रियां श्रध्दापूर्वक अर्पित करें।
● ग्यारह शनिवार को पीपल पर शिवलिंग चढ़ाये व मंत्र जाप करें !
● श्रावण मास में 30 दिनों तक महादेव का अभिषेक एवं महामृत्युंजय मंत्र की एक माला रोज करें।
● महामृत्युंजय कवच का नित्य पाठ करें और श्रावण महीने के हर सोमवार का व्रत रखते हुए शिव का रुद्राभिषेक करें।
● घर की चौखट पर विशेषतया चांदी का स्वास्तिक मांगलिक चिन्ह अंकित करें !
● नागपंचमी, शनिवार या अन्य किसी पंचमी तिथि के दिन 11 नारियल बहते जल में प्रवाहित करें।
● “ॐ रां राहवे नमः ”
● “ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः ”
● अर्धकायं महावीर्यं चंद्रादित्य विमर्दनम् । सिंहिका गर्भसंभूतं तं राहुं प्राणमाम्यहम् !! का 108 बार जप करना चाहिए।
● प्रत्येक बुधवार को काले वस्त्र में एक मुट्ठी उड़द डाल कर, राहु मंत्र का जप कर, भिखमंगे को देने या बहते पानी में डालने से अवश्य लाभ होता है ।
● घर के आग्नेय कोण में नित्य रात्रि लाल बल्ब जलाकर रखें तथा इसकी स्वक्षता का ध्यान रखें!
● प्रत्येक माह की संक्रांति के दिन गंगाजल में गौमूत्र मिलाकर घर के सभी कमरों में छिड़काव करें।
● रसोई घर में बैठकर भोजन करें और बुधवार के दिन ताजी मूली का दान करें।
● मसूर की दाल और कुछ धन सूर्योदय के समय गरीब को दान करें।
● राहु-केतु के बीज मंत्र का 21-21 हजार की संख्या में जप कराएं, हवन कराएं, कंबल दान कराएं व विप्र पूजा करें।
■ काल सर्प योग के साथ कुण्डली में उपस्थित अन्य ग्रहों के योग का भी काफी महत्व होता है !
आपकी कुण्डली में मौजूद अन्य ग्रह योग उत्तम हैं तो संभव है कि आपको इसका दुखद प्रभाव अधिक नहीं भोगना पड़े !

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