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Dr. Yogesh Vyas

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बुध का मीन राशि में परिवर्तन

ज्योतिषशास्त्र में बारह राशियों की गड़ना की गई है। प्रत्येक जातक की एक अलग राशि होती है और उस जातक का स्वभाव भी उस राशि के अनुसार ही संभावित होता है। ज्योतिष शास्त्र में लग्न कुंडली की तरहा ही चंद्र कुंडली का भी महत्व होता है क्योंकि, ग्रहों के गोचर को चंद्र कुंडली के माध्यम से ही जाना जाता है। बुध ग्रह का राशि परिवर्तन हो रहा है। बुध 1 अप्रैल- गुरुवार को कुंभ राशि से मीन राशि में प्रवेश कर रहे हैं। ज्योतिष के अनुसार मीन राशि में बुध नीचे के और कन्या राशि में उच्च के माने गए हैं। बुध- मिथुन और कन्या राशि के स्वामी ग्रह हैं। बुध 16 अप्रैल तक मंगल की राशि मेष राशि में चले जाएंगे ! प्रत्येक ग्रह जब राशि परिवर्तन करता है तो कुछ राशियों को शुभ फल देता है तथा कुछ राशियों के शुभ फल में न्यूनता करता है। ज्योतिष और वास्तु संबंधित किसी भी समस्या के समाधान हेतु आप हमारे जयपुर कार्यालय पर या ऑनलाइन हमारी वेबसाइट - https://astrologeryogesh.com/ या http://jyotishinjaipur.com/ पर या हमारे Blog - grahonkegochar.com या Whatsapp no. 8696743637 पर सम्पर्क कर सकते हैं। बुध आपकी राशि पर क्या शुभ-अशुभ प्रभाव डालते है आइये देखते है--

● मेष राशि- मेष राशि वालों को बुध गोचर के दौरान आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, बनते हुए कार्य कुछ समय के लिए अटक सकते हैं। खर्च बढ़ेगा, भागदौड़ रहेगी। भावनाओं पर नियंत्रण रखें। उसमें बहकर फैसले लेने से बचें। समय आपके लिए थोड़ा तनावपूर्ण हो सकता है।
● वृष राशि- बुध गोचर के दौरान अटका धन वापस मिलेगा। आर्थिक लाभ के साथ आय में भी वृद्धि हो सकती है। सेहत अच्छी रहेगी। आय के साधन बढ़ेंगे। बिजनेस अच्छा रहेगा। मकान या वाहन खरीद सकते हैं। धन लाभ तो होगा ही साथ में आपको सरकार का सहयोग मिलेगा ! प्रतियोगिता परीक्षा में छात्रों को फायदा होगा।
● मिथुन राशि- बुध गोचर के दौरान माता पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की जरूरत है। नई नौकरी या रोजगार में सफलता मिल सकती है। पद और प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है। आत्मविश्वास में कमी आ सकती है, वाद-विवाद से बचें।
● कर्क राशि- बुध गोचर के दौरान अपने कार्यों में गोपनीयता बनाकर रखें। यात्रा करने से बचें। तनावपूर्ण हालात को समझदारी से संभालने का प्रयास करें। पैसों से जुड़े मामलों में रिस्क न लें। निवेश करने से बचें। विभिन्न योजनाओं में सफलता मिलने की संभावना है। सेहत का ध्यान रखें।
● सिंह राशि- बुध गोचर के दौरान कोई निवेश न करें। पैसों से जुड़े मामलों में रिस्क न लें! अपनी वाणी पर कंट्रोल रखें। मानसिक तनाव का शिकार हो सकते हैं। शेयर मार्केट में पैसा लगाने के लिए समय उचित नहीं है। सेहत के प्रति सजग रहें, इसके अलावा समय उत्तम है।
● कन्या राशि- बुध गोचर के दौरान बिजनेस के लिए समय अच्छा रहेगा, धन लाभ के योग बनेंगे। कार्यस्थल पर तरक्की मिल सकती है। विवाह की बात पक्की हो सकती है। संतान की ओर से शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है!
● तुला राशि- बुध गोचर के दौरान सफलता मिल सकती है। गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें। किसी को भी रुपये उधार देने से बचें क्योंकि वह धन फंस सकता है। अपनी बातों को गोपनीय रखें। आर्थिक स्थिति सुधरेगी !
● वृश्चिक राशि- बुध गोचर के दौरान मेहनत का फल मिलेगा ! पद और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। लेन देन के मामले में सतर्क रहने की आवश्यकता है। लव मैरिज के लिए अच्छा समय है। संतान प्राप्ति का योग है। छात्रों के लिए समय उत्तम रहेगा।
● धनु राशि- बुध गोचर के दौरान शुभ परिणाम मिलेंगे ! बिजनेस या नौकरी करने वालों को लाभ का योग है। प्रमोशन के योग बन सकते हैं। कार्यक्षेत्र में विस्तार हो सकता है। विदेश जाने की प्लानिंग सफल हो सकती है। मकान या वाहन खरीद सकते हैं।
● मकर राशि- बुध गोचर के दौरान पैतृक संपत्ति का लाभ मिल सकता है। यात्रा का योग बन रहा है, जो लाभकारी हो सकता है। समय अच्छा रहेगा। बुजुर्गों का ख्याल रखने की आवश्यकता है। भाई-बहन के बीच मतभेद हो सकते हैं। क्रोध, जिद और आवेश पर नियंत्रण रखें ।
● कुंभ राशि- बुध गोचर के दौरान शुभ समाचार की प्राप्ति होगी। पुरान अटका हुआ धन मिल सकता है। अटके हुए कार्य बनेंगे, विवाह का भी योग है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता हासिल हो सकती है। मेहनत से परीक्षा में सफलता संभव है।
● मीन राशि- बुध गोचर के दौरान मिले-जुले परिणाम मिलेंगे ! नौकरी, बिजनेस और घर में समय आपके अनुकूल होगा। परिवार में मांगलिक काम और आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है। खानपान और सेहत का ध्यान रखें। कार्यस्थल पर वाद-विवाद से बचें।
● ज्योतिष फलदायक न होकर फल सूचक है ! किसी भी निष्कर्ष पर पहुचने से पहले कुंडली के और भी ग्रहो की स्तिथि, बलाबल को भी ध्यान में रख कर तथा किसी योग्य ज्योतिर्विद से परामर्श कर ही किसी भी निर्णय पर पहुचना चाहिए |



ग्रह युति का देश-दुनिया पर असर-

वर्तमान समय देश व दुनिया के लिये काफी हलचल वाला चल रहा है। ज्योतिष की बात करें तो इसमें मकर राशि में होने वाली पाँच ग्रहों की युति को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा सकता है। ज्योतिष ने इस बात को माना है कि जब भी किसी एक राशि में पाँच या इससे अधिक ग्रह (राहु-केतु के अलावा) एक साथ युति करते हैं तो देश-दुनिया में अप्रत्याशित, दूरगामी एवं लम्बे समय तक प्रभावित करने वाले बदलाव देखने को मिलते हैं। जब दिसम्बर 2019 में पाँच ग्रह एक साथ धनु राशि में आये थे तो पूरे विश्व ने कोरोना जैसी महामारी को देखा। इस महामारी के कारण पूरे विश्व में लाखों लोगों की तो जान जा चुकी है और सम्पूर्ण विश्व को आर्थिक मन्दी का भी सामना करना पड रहा है। इस समय लोगों की जीवन शैली में काफी बड़े बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं।

अब भारतवर्ष की कुंडली की बात करें तो भारत को 15 अगस्त 1947 की रात में 12 बजे आजादी मिली थी। भारत की कुंडली वृष लग्न की है। इसके लग्न में राहु और सप्तम भाव में केतु है। कुंडली के पराक्रम भाव में कर्क राशि में चंद्रमा भी बुध, शनि, शुक्र व सूर्य ग्रह के साथ विध्यमान होकर पन्चग्रही योग का निर्माण कर रहा है। भारत की कुंडली में शुक्र व शनि ग्रह अस्त हुए हैं और मंगल अपने शत्रु बुध की राशि में धन स्थान में बेठा हुआ है। कुंडली के अनुसार भारत के स्वभाव और प्रकृति की बात करें तो भारत का लग्नेश शुक्र व राशीष चंद्रमा दोनो ही सौम्य ग्रह हैं। इसी कारण भारत का स्वभाव शान्त और क्षमाशील है लेकिन अति हो जाने पर यही भारत अपनी कुंडली के पराक्रम भाव में बन रहे पन्चग्रही योग के कारण अपने विरोधियों को जवाब भी पूर्ण दृढता और विश्वास के साथ देता है। वर्तमान समय में मकर राशि में गुरु व शनि के साथ सूर्य व शुक्र की युति का होना शुभ फलदायक नहीं है। इन ग्रहों के परिणाम स्वरूप भारत में किसान आन्दोलन ने बडा रूप ले लिया है। उनके प्रदर्शन और विवाद भी हुए और अब कई नये-नये शव्दों का उदय भी देखने को मिल रहा है। नवीनतम उदाहरण में उत्तराखंड की प्राकृतिक आपदा सामने आई है। यानि कि जो हालात इन ग्रहों की युति से बन रहे हैं वो, शीघ्र ही सामान्य नहीं हो पायेंगे। इस युति के दूरगामी और लम्बे समय तक दिखाई देने वाले परिणाम सामने आयेंगे। इन्हीं ग्रहों के प्रभाव से भारत के अलावा अमरीका, फ्रांस, इजरायल, कनाडा, पाकिस्तान, म्यांमार व अफ्रीका के कई देशों में भी जनता अपने विरोध प्रदर्शन के लिए सडकों पर उतरी है।

9 फरवरी की रात्रि में चंद्रमा का भी मकर राशि में पहले से विद्यमान 5 ग्रहों के साथ युति करना कोई शुभ नहीं कहा जा सकता और इस 6 ग्रहों की युति के पूरे विश्व में देखने को मिलेंगे। शुरुआत में ही अभी अमावस्या के तुरन्त बाद 12 की रात में हमें एक भूकम्प देखने को मिल चुका है । ये ग्रह एक साथ युति करने पर किसी युध्द या बड़े आन्दोलन को जन्म देते हैं। इन ग्रह योगों से देश के आगामी चुनावों में हिंसा देखने को मिल सकती है। इसके साथ ही देश व विश्व में धार्मिक उन्माद, प्राकृतिक आपदाएं, समुद्री तूफान, राजनीतिक उठापटक और अपनी मांगों के लिये आन्दोलन आदि की भी सम्भावना नजर आ रही है।

भारत में पैट्रोल, कृषि उत्पादों, खनिज, सोना आदि के मूल्यों में भी बृद्धि देखने को मिलेगी। किसान आन्दोलन अभी बढ़ेगा और जल्दी ही एक साथ समाप्त नहीं हो पायेगा। सरकार के कुछ कठोर निर्णयों से लोगों की नाराजगी बढ सकती है और सरकार को भी अपने निर्णयों में कुछ संशोधन करने पडेंगे। लोगों का प्राकृतिक आपदाओं से भी सामना होगा, महंगाई बढी हुई नजर आयेगी। इस समय देश-विदेश में न्यायालयों को भी सरकार के कुछ फैसलों में हस्तक्षेप करना पड सकता है। इन विशेष ग्रह युतियों के कारण अभी देश में पूर्ण शान्ति देखने को नहीं मिलेगी। राहु ग्रह की भी इन सभी ग्रहों पर पूर्ण दृष्टि होने के कारण अभी कुछ नये षड्यंत्र और आन्दोलन भी देखने को मिल सकते हैं। बड़े लोग भी झूठी बात बोलेंगे और कुछ लोग भारत की छवि को विश्व स्तर पर कमजोर करने का प्रयास अभी करेंगे परन्तु सरकार के कठोर निर्णयों से उपद्रवियों में हलचल रहेगी व कमजोर भी होंगे। भारत की सत्ता के साथ ही दुनिया के कई और देशों में भी सत्ता के लिये संघर्ष देखने को मिलेगा। चीन व पाकिस्तान के लिए भी इन ग्रहों की युति सुखद फलदायी नहीं रहेगी।

शेयर बाजार में भी बड़ी उछाल के बाद बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी। अब ऐसा नहीं है कि यही सब बहुत लम्बे समय तक चलेगा। इन हालातों में बदलाब हमें 6 अप्रैल को गुरु के कुम्भ राशि में जाने के बाद देखने को मिलेंगे। तब आन्दोलन में भी काफी सुधार सम्भावित होगा। नया संवत प्रारम्भ होने के साथ ही ग्रहों की युतियों में भी परिवर्तन होने पर एक तरफ तो विज्ञान व शोध के क्षेत्रों से अच्छी खबरें आयेंगी वहीं दूसरी तरफ कोरोना वेक्शीन में उपलब्धि से भी भारत की शाख पूरे विश्व में बढेगी। ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन, सूचना प्रौद्योगिकी एवं साफ्टवेयर आदि के क्षेत्रों में सुखद परिवर्तन व प्रगति देखने को मिलेगी। इसके साथ ही धीरे-धीरे आर्थिक क्षेत्रों में भी सुधार देखने को मिलेगा। भरतीय मूल के कई नागरिक भी कई देशों में उच्च पदों पर स्थापित होंगे तथा स्वयं भारत भी कई देशों का मार्गदर्शक बनेगा। प्रधान-मंत्री नरेंद्र मोदी जी की वृश्चिक लग्न व राशि की कुंडली में गोचर से इन सभी ग्रहों की युति इनके पराक्रम भाव में हो रही है तथा राहु की भी इन पर पूर्ण दृष्टि होने के कारण मोदी अपने पराक्रम व राजनैतिक कौशल से इन सभी अव्यवस्थाओं को नियन्त्रित करने में काफी सफल भी होंगे।

मोदी की कुंडली में पंचम भावस्थ राहु पर एकादश भाव में बैठे तीन ग्रहों की पूर्ण दृष्टि इनको राजनीती का श्रेष्ठ जानकर व कुशल प्रयोक्ता बनाती है। इन सभी ग्रह योगों के परिवर्तन से 2021 में भारत अपनी प्रगति की राह पर चल पडेगा।


डॉ योगेश व्यास
ज्योतिषाचार्य (टॉपर),
नेट (साहित्य एवं ज्योतिष)
पीएच.डी(ज्योतिषशास्त्र)।।

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